कांग्रेस में बढ़ता प्रियंका गांधी का राजनीतिक कद, असम में अहम जिम्मेदारी सौंपने के पीछे क्या है रणनीति
नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित चुनावों के मद्देनज़र पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए स्क्रीनिंग समितियों का गठन किया है। इसी क्रम में कांग्रेस ने असम की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी है। यह पहला अवसर है जब गांधी परिवार के किसी सदस्य को किसी राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जिससे पार्टी के भीतर प्रियंका गांधी के बढ़ते राजनीतिक कद के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
स्क्रीनिंग कमेटी का मुख्य दायित्व विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करना होता है। राज्य की प्रत्येक विधानसभा सीट से प्राप्त नामों में से उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन कर उन्हें प्राथमिकता क्रम में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा लिया जाता है।
असम की स्क्रीनिंग कमेटी में प्रियंका गांधी के साथ अन्य सदस्यों के अलावा सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को भी शामिल किया गया है। यह तथ्य राजनीतिक दृष्टि से खासा चर्चा में है, क्योंकि हाल ही में इमरान मसूद द्वारा प्रियंका गांधी को लेकर दिया गया बयान राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था। उस बयान पर राजनीतिक हलकों में काफी बहस हुई थी, लेकिन अब उन्हें प्रियंका गांधी की अगुवाई वाली समिति में शामिल किया जाना पार्टी के भीतर नए संतुलन और रणनीति की ओर इशारा करता है।
प्रियंका गांधी को असम की जिम्मेदारी क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रियंका गांधी को असम की स्क्रीनिंग कमेटी का नेतृत्व सौंपना केवल औपचारिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक रणनीति छिपी है। असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को पार्टी की युवा पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। उनके पिता तरुण गोगोई राज्य के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक पार्टी नेतृत्व के करीबी माने जाते थे। वर्तमान में गौरव गोगोई लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में उनकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट, जीतू पटवारी और गौरव गोगोई जैसे नेताओं को भविष्य की धुरी माना जा रहा है। ऐसे में प्रियंका गांधी को असम में गौरव गोगोई के साथ समन्वय की भूमिका में देखा जा रहा है, ताकि संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूती मिल सके।
क्या असम में कांग्रेस के लिए संभावना है?
असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को चुनौती देना आसान नहीं माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तत्काल सत्ता परिवर्तन की संभावना कम है, लेकिन लंबे समय में कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछली बार 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 75 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 50 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। वोट प्रतिशत के लिहाज से दोनों गठबंधनों के बीच अंतर बेहद कम, मात्र लगभग डेढ़ प्रतिशत का रहा था।