मथुरा आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त अधिवक्ताओं के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इण्डिया ने बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए एक बड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला लिया है। बार सचिव शिव कुमार लवानिया के अनुसार अधिवक्ता इन्द्रमोहन गौतम द्वारा अपने आपराधिक इतिहास को छुपाते हुए वर्ष 2017 में बार एसोसिएशन मथुरा तथा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में झूठा शपथपत्र प्रस्तुत कर सदस्यता प्राप्त की गई थी जिसके बाद वकालत का चोला पहनकर वे लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए। गंभीर आरोपों और अनुशासनहीन आचरण के चलते बार एसोसिएशन मथुरा द्वारा उन्हें तीन बार निष्कासित किया गया था जिसकी सूचना बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी गई थी।
पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 18 दिसंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए अधिवक्ता इन्द्रमोहन गौतम का वकालत लाइसेंस 5 वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है जिसके चलते अब वे भारत वर्ष के किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कड़ी चेतावनी भी दी है कि निलंबन अवधि के दौरान यदि उनका आचरण संतोषजनक नहीं पाया गया या वे किसी भी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त पाए गए तो उनका वकालत लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाएगा। इस कार्रवाई को न्यायिक गरिमा और अधिवक्ता पेशे की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और सख्त संदेश माना जा रहा है जिससे साफ है कि अब कानून की आड़ में अपराध को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Sign in
Sign in
Recover your password.
A password will be e-mailed to you.