वृंदावन में प्रशासन की मनमानी कहीं रोक न दें बढ़ते पर्यटन की गति

– श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ब्रजभूमि में मिलती विश्व स्तरीय सुविधाएं

वृंदावन। मंदिरों की नगरी कहे जाने वाली श्रीधाम वृंदावन में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा तमाम प्रयास किये जा रहे हैं जिसके तहत एक ओर ठाकुर बाँके बिहारी के दर्शनों के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुओं को पंजीकरण के माध्यम से दर्शन करने की व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास किये जा रहे है तो वही दूसरी ओर पिछले कुछ दिनों से धर्मनगरी में संचालित होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, मैरिज होम संचालकों को विकास प्राधिकरण द्वारा भेजे गए नोटिसों के बाद इनके संचालकों में प्रशासन की दोहरी नीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
संचालकों का कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने की दावे तो जिला प्रशासन कर रहा है लेकिन यह दावे तभी पूर्ण हो सकते हैं जब धर्मनगरी में होटल,गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, मैरिज होम संचालकों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाए। पिछले कुछ दिनों से विप्रा द्वारा नोटिस भेजने के नाम पर जिस तरह से यहां पर कारोबारियों को डराने के साथ उत्पीड़न- शोषण की बातें सामने आ रही है। वह मथुरा में बढ़ते पर्यटन पर प्रतिकूल असर डालने वाला साबित होगा। एक अनुमान के मुताबिक मथुरा जिले से सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व में धर्मनगरी में संचालित होटल, गेस्ट हाउस रेस्टोरेंट मैरिज होम्स की एक बड़ी भागीदारी है। पिछले एक वर्ष में जिस तरह से देश के अन्य पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों को पीछे छोड़ते हुए ब्रज में पर्यटन को बढ़ावा मिला है । उसमें यहां के होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट आदि में मिलने वाली सुख सुविधाओं का भी एक बड़ा योगदान है।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर माहौल व सुविधा उपलब्ध करा रहे होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, मैरिज होम संचालकों की इच्छा शक्ति से बने अनुकूल माहौल से ही पर्यटन को बढ़ावा मिला है। ऐसे में जिला प्रशासन के द्वारा विप्रा के माध्यम से भेजे जा रहे नोटिस में तय किए गए मानकों व दिशा निर्देशों को पूरा न करने के नाम पर इन दोनों होटल गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, मैरिज होम्स संचालकों को लेकर लगातार की जारी कार्रवाई से एक डर का माहौल बना हुआ है। यह डर कहीं ब्रज में लगातार बढ़ती पर्यटन की गति को कहीं धीमा करने वाला साबित न हो क्योंकि होटल गेस्ट हाउस रेस्टोरेंट मैरिज होम संचालक को का मानना है कि शासन प्रशासन द्वारा सहयोग न मिलने पर वह अपना कारोबार समेटने के लिए मजबूर होगें।