बाल श्रम के खिलाफ मथुरा में सख्ती तेज , 2027 तक जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य

कलेक्ट्रेट में जिला टास्क फोर्स की बैठक, बाल श्रम कराने पर सजा और जुर्माने के प्रावधानों की दी गई जानकारी

मथुरा । जनपद में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। शुक्रवार को जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला टास्क फोर्स, बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास समिति तथा जिला बंधुआ श्रम सतर्कता समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

बैठक में सहायक श्रम आयुक्त एम.एल. पाल ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 (संशोधित 2016) के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कार्यों में लगाने पर भी सख्त रोक है। ऐसे मामलों में दोषियों को 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता ने निर्देश दिए कि बाल श्रम में चिन्हित बच्चों का त्वरित शैक्षिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही उनके परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि वे दोबारा बाल श्रम की स्थिति में न आएं। उन्होंने महिला कल्याण, समाज कल्याण, कौशल विकास, आपूर्ति विभाग, मनरेगा एवं श्रम विभाग को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी विभाग अंतर्विभागीय तालमेल बनाकर कार्य करें और शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। प्रशासन का लक्ष्य है कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप वर्ष 2027 तक मथुरा जनपद को पूर्णतः बाल श्रम मुक्त बनाया जाए।

इस दौरान अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डॉ. अमरेश कुमार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, उपायुक्त मनरेगा लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी अंकित बंसल
सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।