अलीगढ़: खुशियों के बीच पसरा मातम; माता-पिता की गोल्डन जुबली मनाने के 4 दिन बाद युवा व्यापारी जीतू वार्ष्णेय का निधन
अलीगढ़। नियति का चक्र कब और कैसे घूम जाए, इसका अंदाजा लगाना असंभव है। अलीगढ़ के प्रतिष्ठित कृष्णा टॉकीज परिवार में जहाँ अभी चार दिन पहले तक शहनाइयां और खुशियों की गूँज थी, वहाँ आज सन्नाटा और चीख-पुकार है। शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी जवाहरलाल वार्ष्णेय के सुपुत्र जितेश वार्ष्णेय (50 वर्ष) उर्फ जीतू का मंगलवार रात अचानक दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया।
विदित हो कि बीते 20 फरवरी को ही जीतू वार्ष्णेय ने अपने नाती के पहले जन्मदिन और अपने माता-पिता (जवाहरलाल वार्ष्णेय एवं ब्रजलता वार्ष्णेय) की स्वर्ण जयंती (गोल्डन जुबली) का भव्य आयोजन आभा ग्रांट रिजॉर्ट में किया था। पूरे शहर के गणमान्य लोग उस उत्सव के साक्षी बने थे और परिवार खुशियों से सराबोर था। किसे पता था कि विधाता ने कुछ और ही लिख रखा है।
संजय वार्ष्णेय उर्फ बॉबी ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार रात्रि करीब 10 बजे जीतू के सीने में अचानक तेज दर्द उठा और वे बेहोश हो गए। परिजन उन्हें तत्काल वरुण हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज लेकर भागे, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था चिकित्सकों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (मृत) घोषित कर दिया। जितेश वार्ष्णेय अपने मिलनसार स्वभाव और सेवाभावी व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। उनके निधन की खबर फैलते ही अलीगढ़ के व्यापारिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है।