‘हर घर जल’ के दावों की खुली पोल: बाजना कस्बे में दम तोड़ते सरकारी हैंडपंप, निजी बोरिंग बनी सार्वजनिक संपत्ति की कब्र

मथुरा । एक ओर सरकार ‘हर घर जल’ योजना के तहत हर नागरिक तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं मांट तहसील के बाजना कस्बे में जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। कस्बे में लगे सरकारी हैंडपंप, जो कभी राहगीरों और गरीब तबके की प्यास बुझाने का सहारा थे, आज बदहाली के शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं।
कस्बे के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण करने पर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है। कई हैंडपंप मिट्टी में आधे दब चुके हैं, तो कई स्थानों पर इन्हें कूड़ा फेंकने का स्टैंड बना दिया गया है। वर्षों से मेंटेनेंस न होने के कारण पाइपों में जंग लग चुकी है और प्लेटफॉर्म टूट चुके हैं, जिससे आसपास जलभराव और गंदगी फैल रही है। यह स्थिति न केवल पेयजल संकट को बढ़ा रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी पैदा कर रही है।

सबसे गंभीर मामला सरकारी संपत्ति के खुलेआम निजीकरण का है। नियमों को ताक पर रखकर कई प्रभावशाली लोगों ने सरकारी हैंडपंपों के भीतर अपनी निजी समरसेबल डाल ली है। कुछ स्थानों पर तो हैंडपंप को पूरी तरह खत्म कर वहां चबूतरा बनाकर निजी बोरिंग कर ली गई है। इस तरह सार्वजनिक प्याऊ अब कुछ खास घरों की निजी जागीर बनकर रह गई है।
जनता परेशान, प्रशासन मौन स्थानीय निवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी का मौसम सिर पर है और यदि समय रहते हैंडपंपों की मरम्मत व पुनर्स्थापना नहीं की गई तो कस्बे में गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो जाएगा। लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सरकारी धन से लगाई गई सार्वजनिक संपत्तियों का इस तरह दुरुपयोग और उन पर अवैध कब्जा प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इन बदहाल हैंडपंपों को फिर से जनता की प्यास बुझाने लायक बनाएंगे या ‘हर घर जल’ का नारा सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा?