विकसित भारत के संकल्प में CA बने सारथी : ‘वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स’ में डॉ. विकास चतुर्वेदी सम्मानित
ग्रेटर नोएडा | इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का महाकुंभ ‘वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स (WofA) 2.0’ का दूसरा संस्करण उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ । इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दुनिया भर से आए करीब 10,000 विशेषज्ञों ने शिरकत की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक विस्तार की संभावनाओं पर मंथन करना है। इस अवसर पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एम्स्टर्डम चैप्टर को सर्वश्रेष्ठ विदेशी चैप्टर का पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट पेशेवर मानकों को बनाए रखने के लिए दिया गया है।
इस अवसर पर उत्तर भारत की प्रतिष्ठित फर्म पी. एल. टंडन एंड कंपनी के प्रतिनिधि सीए डॉ. विकास चतुर्वेदी ने बताया कि 1941 से अपनी पहचान बनाने वाली उनकी फर्म अब भारतीय MSMEs को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के मिशन पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “अब समय केवल ऑडिट और टैक्स तक सीमित रहने का नहीं बल्कि AI, आईटी एडवाइजरी और सस्टेनेबिलिटी गवर्नेंस जैसे नए क्षेत्रों में महारत हासिल करने का है।”
भारत और EFTA (FTA) समझौते पर चर्चा करते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने एक बड़ा अनुमान साझा किया। उन्होंने कहा कि अगले 5 वर्षों में भारत-यूरोप के बीच सक्रिय कंपनियों की संख्या 10,000 से बढ़कर 25,000 पार कर जाएगी। द्विपक्षीय व्यापार अगले 7 वर्षों में 200 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। MSMEs को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि छोटे शहरों की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाना चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए CA समुदाय को आपसी प्रतिस्पर्धा छोड़कर ‘कोलाबरेशन’ पर ध्यान देना चाहिए ताकि विश्व स्तरीय भारतीय फर्में बनाई जा सकें। इस आयोजन ने नोएडा और उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है, जो देश की आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो रहा है।
”भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इंडिया एक्सपो मार्ट जैसे विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और ICAI की वैश्विक पहुंच इस बात का प्रमाण है कि हम अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
— सीए डॉ. विकास चतुर्वेदी