10 साल में छह गुना बढ़ा म्यूचुअल फंड का निवेश मूल्य, अब 75 लाख करोड़

नई दिल्ली । देश के दूर-दराज इलाके तक गहरी पहुंच बना रहे म्यूचुअल फंड ने 10 साल में छह गुना की वृद्धि हासिल की है। 2015 में कुल 41 फंड हाउसों का एयूएम (Assets Under Management) यानी निवेशकों के निवेश का मूल्य 12.29 लाख करोड़ रुपये था, जो अब 75 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। हालांकि, इन 10 वर्षों में दाइवा, एलएंडटी, जेपी मॉर्गन और आईडीएफसी जैसे कई फंड हाउस कारोबार बेचकर इस उद्योग से बाहर भी निकल गए।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी या AMFI) के मुताबिक, इस समय 47 फंड हाउस हैं, जिनमें एक लाख करोड़ रुपये के एयूएम वाले फंड हाउस की संख्या 19 है। एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एयूएम वाले फंडों में इन 10 वर्षों में सबसे कम वृद्धि निप्पॉन, फ्रैंकलिन, आदित्य बिड़ला और यूटीआई म्यूचुअल फंड की रही है। 2015 में तीसरे स्थान पर रहा निप्पॉन अब चौथे पर आ गया है। इसका एयूएम 1.44 लाख करोड़ से चार गुना बढ़कर 6.12 लाख करोड़ पहुंच गया।

फ्रैंकलिन टेंपल्टन का एयूएम 74,311 करोड़ से केवल 1.5 गुना बढ़कर 1.14 लाख करोड़ रुपये रहा। यूटीआई 2015 में 5वें स्थान से खिसककर अब सातवें पर आ गया है। इसका एयूएम 92,730 करोड़ से 4 गुना बढ़कर 3.60 लाख करोड़ रहा। आदित्य बिड़ला चौथे से छठे स्थान पर आ गया है। इसका एयूएम 1.25 लाख करोड़ से तीन गुना बढ़कर 4.03 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इस समय एक लाख करोड़ से ज्यादा के एयूएम वाले फंडों में सर्वाधिक 128 गुना वृद्धि एडलवाइस की है। 2015 में इसका एयूएम सिर्फ 1,148 करोड़ था, जो अब 1.48 लाख करोड़ रुपये हो गया। मिरै 99 गुना के साथ दूसरे स्थान पर है। इसका एयूएम 1,981 करोड़ से बढ़कर 1.18 लाख करोड़ हो गया। एचएसबीसी का एयूएम 17 गुना बढ़कर 1.29 लाख करोड़, मोतीलाल ओसवाल का 38 गुना बढ़कर 1.04 लाख करोड़ और पीपीएफएएस का 19 गुना बढ़कर 1.16 लाख करोड़ हो गया है।

भारतीय बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि डीमैट खातों की संख्या 2019 के 3.6 करोड़ से बढ़कर 2025 में 19.4 करोड़ पहुंच गई। सेबी के मुताबिक, इस अवधि में सूचीबद्ध कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों का स्वामित्व 13 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी पहुंच गया। हालांकि, विदेशी निवेशकों का स्वामित्व 22 फीसदी से घटकर 17 फीसदी के स्तर पर आ गया। सेबी के मुताबिक, 10 वर्षों में भारतीय कंपनियों ने शेयर एवं ऋण के जरिये करीब 93 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। 2024-25 में इक्विटी जारी कर रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ जुटाए गए, जिसमें आईपीओ से 1.7 लाख करोड़ शामिल हैं।