ऊं नमो भगवते वासुदेवाय‘‘ दिव्य मंत्र के जाप से ध्रुव जी को मिला था श्री हरि का असीम आशीर्वाद : मृदुल कृष्ण शास्त्री

नई दिल्ली। पीतमपुरा वैस्ट में चल रही श्रीमद् भागवत् कथा ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन सैकड़ों वैदिक संस्कृति से जुड़े विद्वानों द्वारा आहूतियां प्रदान की जा रही हैं। इस ज्ञान यज्ञ को सुप्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय कथा वाचक वृंदावन के मृदुल कृष्ण शास्त्री अपने श्रीमुख से पूरे विश्व में सनातन धर्म की पताका फहरा रहे हैं। कथा का शुभारंभ व्यासपीठ की आरती उतारकर मुख्य अतिथि दिल्ली के पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं वर्तमान सांसद उत्तरी दिल्ली डा. हर्षवर्धन ने एवं स्वागताध्यक्ष लक्ष्मी नारायण गोयल, अखिल गुप्ता प्रधान, अनिल बागला एवं रामविलास बंसल नीरज रायजादा घनश्याम दास गोयल मुकेश कुमार गुप्ता राजेश मित्तल वीरेन्द्र कुमार गुप्ता अजय अग्रवाल विजय चौधरी मुनीश बंसल, राजीव अग्रवाल, नितिन मित्तल लोकेस शर्मा ने आदि ने किया। दर्शना गोयल साधना गुप्ता बिन्दु मित्तल माधुरी अग्रवाल ने किया।
व्यास गद्दी पर विराजमान भागवताचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कपिल मुनि ज्ञान के अवतार थे एवं मुनि कर्दम एवं माता देवहुति के पुत्र थे। कपिल मुनि ने सांख्यशास्त्र एवं अष्टांग योग की रचना की एवं उनका धाम गंगासागर है। ब्रज में एक कहावत् है कि सारे तीर्थ बार-बार लेकिन गंगासागर एक बार।
ध्रुव जी को बचपन में पिता की गोद नहीं मिली तो नारद जी द्वारा मार्गदर्शन किया गया उन्होंने जंगल में जाकर ’’ऊं नमो भगवते वासुदेवाय‘‘ दिव्य मंत्र का जाप करने को कहा जिससे भगवान श्रीहरि विस्णु एवं जगत जननी मां लक्ष्मी की गोद मिली। कथा का भावार्थ यह है कि जिसे जग के पालनहारी की गोद मिल गयी तो उन्होंने इस पृथ्वी पर 36 हजार वर्ष तक राज किया। आज भी तारामण्डल में सबसे चमकता हुआ तारा ध्रुव जी हैं।
आज के संत दर्शन में स्वामी श्री ऋसिस्वरानंद महाराज एवं आशुतोष महाराज देवभूमि हरिद्वार से पधारे जिन्होंने सनातन धर्म उत्थान पर मार्गदर्शन किया।